लोनी बेहटा हाजीपुर में मासिक दंगल की शुरुआत, मनोज धामा बोले—युवाओं के शारीरिक विकास और नशामुक्त समाज के लिए जरूरी है कुश्ती
युवा शक्ति की पहल, हर महीने की 11 तारीख को होगा दंगल; बेटियों ने भी अखाड़े में उतरकर दिखाया दमखम

रिपोर्ट: सचिन कश्यप
लोनी/गाजियाबाद। गांव बेहटा हाजीपुर में युवा शक्ति की ओर से युवाओं को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने, कुश्ती की पारंपरिक संस्कृति को बढ़ावा देने और नशे से दूर रहने के लिए एक सराहनीय पहल की गई है। इसी क्रम में गांव में हर महीने की 11 तारीख को दंगल आयोजित करने की शुरुआत की गई। इस मासिक दंगल के प्रथम आयोजन में राष्ट्रीय लोक दल के नेता एवं लोनी नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष मनोज धामा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यक्रम में पहुंचने पर आयोजकों ने मनोज धामा का फूल-मालाओं और ढोल-नगाड़ों के साथ जोरदार स्वागत किया तथा स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
युवाओं की पहल को मनोज धामा ने सराहा
इस अवसर पर मनोज धामा ने कहा कि गांव बेहटा हाजीपुर में पहले भी दंगल का आयोजन होता रहा है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से किसी कारणवश यह परंपरा बंद हो गई थी। अब गांव की युवा शक्ति ने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए मासिक दंगल की शुरुआत की है, जो बेहद प्रशंसनीय है।
उन्होंने कहा कि दंगल और कुश्ती केवल खेल नहीं, बल्कि शारीरिक विकास, अनुशासन, आत्मविश्वास और स्वस्थ जीवनशैली का माध्यम हैं। ऐसे आयोजनों से युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है और वे नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहने के लिए प्रेरित होते हैं। उन्होंने गांव के युवाओं की इस पहल की सराहना करते हुए हरसंभव सहयोग और मार्गदर्शन देने का आश्वासन दिया।
कई अखाड़ों के पहलवानों ने दिखाया दमखम
दंगल में आसपास के कई जनपदों और विभिन्न अखाड़ों से पहुंचे पहलवानों ने अपनी कुश्ती कला और दमखम का प्रदर्शन किया। आयोजन में डगरपुर के गुरु लीलू पहलवान, गोठरा के मिठ्ठन पहलवान, गुरु राजकुमार गोस्वामी अखाड़ा, गोकलपुरी के गुरु राधेश्याम अखाड़ा, सोनीपत के इंदिरा गांधी स्टेडियम, शाहदरा के बाबूराव अखाड़ा, मलकपुर के सुभाष पहलवान अखाड़े सहित गाजियाबाद, रिस्तल और गनौली आदि स्थानों से पहलवान पहुंचे।
अखाड़े में पहलवानों के बीच रोमांचक कुश्तियां हुईं। खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। विजेता पहलवानों का उत्साहवर्धन किया गया और उपस्थित लोगों ने तालियों के साथ खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया।
बेटियों ने भी कुश्ती में दिखाया दमखम
इस दंगल की खास बात यह रही कि बेटियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने-अपने वजन वर्ग में कुश्ती लड़ी। महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन को देखकर दर्शकों ने तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया। बेटियों की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि खेल और पहलवानी के क्षेत्र में महिलाएं भी अपनी प्रतिभा और ताकत के दम पर आगे बढ़ रही हैं।
नशे से दूर रखने के लिए बनाया मासिक दंगल का मिशन
कार्यक्रम के आयोजक सूरज धामा ने बताया कि गांव के युवाओं ने मिलकर क्षेत्र के नौजवानों को शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और नशे की लत से दूर रखने के उद्देश्य से इस अभियान की शुरुआत की है। अब हर महीने की 11 तारीख को दंगल आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि युवाओं को खेलों और कुश्ती से जोड़ना समय की जरूरत है। नशे की लत से व्यक्ति के साथ-साथ उसका पूरा परिवार प्रभावित होता है। इसलिए आयोजक गांव और आसपास के क्षेत्रों में जाकर युवाओं को जागरूक करेंगे और उन्हें दंगल में भाग लेने के लिए प्रेरित करेंगे। उनका उद्देश्य एक स्वस्थ, जागरूक और नशामुक्त समाज का निर्माण करना है।
हरसंभव सहयोग का मनोज धामा ने दिया भरोसा
मनोज धामा ने आयोजक मंडल और गांव की युवा शक्ति को आश्वस्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के सामाजिक और खेल आयोजनों के लिए जब भी उनके मार्गदर्शन, स्थान या अन्य किसी सहयोग की आवश्यकता होगी, वह युवाओं के साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि क्षेत्र का युवा स्वस्थ रहे, खेलों में आगे बढ़े और अपनी प्रतिभा के दम पर गांव तथा क्षेत्र का नाम रोशन करे।
ये गणमान्य लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर रणवीर धामा, देवेंद्र धामा, तेजिंदर धामा, नरेंद्र धामा, अजय डागर (गोल्ड मेडलिस्ट), पवन कुमार (सीआईएसएफ), सलीम पहलवान, बबलू खलीफा, सभासद मोनू धामा, सचिन धामा, दीपक धामा, रौनक धामा, मन्नू पंडित, सेठ दर्शन लाल, पप्पू पहलवान, कुल्लू पहलवान, कालू धामा और ब्रह्म सिंह सहित हजारों की संख्या में ग्रामीण एवं क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
मासिक दंगल की इस पहल से क्षेत्र में कुश्ती और पारंपरिक खेलों को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने की उम्मीद है।



