लोनी में बिजली संकट के बीच पूर्व सभासद के प्रतिष्ठान पर विजिलेंस की कार्रवाई, घरेलू कनेक्शन पर व्यावसायिक उपयोग का आरोप
लोनी, गाजियाबाद | 25 जुलाई 2026

लोनी में बिजली संकट के बीच पूर्व सभासद के प्रतिष्ठान पर विजिलेंस की कार्रवाई, घरेलू कनेक्शन पर व्यावसायिक उपयोग का आरोप
लोनी, गाजियाबाद | 25 जुलाई 2026
एक ओर जहां लोनी क्षेत्र की जनता भीषण बिजली संकट और कटौती से परेशान है, वहीं दूसरी ओर विकास कुंज, सोनिया नगर निवासी एवं पूर्व सभासद मुकेश पाल के प्रतिष्ठान पर शनिवार को विद्युत विभाग की विजिलेंस टीम ने छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान एसडीओ नाईपुरा एवं पुलिस टीम भी मौके पर मौजूद रही।

सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान घरेलू बिजली कनेक्शन का व्यावसायिक कार्य में उपयोग किए जाने की अनियमितता सामने आई। बताया जा रहा है कि संबंधित परिसर में दूध डेयरी का संचालन किया जा रहा है। हालांकि विद्युत विभाग की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान या जांच रिपोर्ट जारी नहीं की गई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति लंबे समय से विद्युत विभाग के खिलाफ धरना-प्रदर्शन, नारेबाजी और अधिकारियों पर दबाव बनाने का काम करता रहा है, जबकि दूसरी ओर स्वयं बिजली नियमों का पालन नहीं कर रहा था। लोगों का यह भी कहना है कि परिसर में एसी, कूलर, पंखे और वाई-फाई केबल का बड़े पैमाने पर सुचारू रूप से कार्य जारी है व अन्य विद्युत उपकरण होने के बावजूद बिजली बिल अपेक्षाकृत बहुत कम आता था। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। वहीं लोगों की मांग है कि उक्त व्यक्ति का पिछला 1 साल के बिल का रिकॉर्ड भी चेक किया जाए।
स्थानीय नागरिकों का यह भी आरोप है कि संबंधित व्यक्ति पांच वर्ष स्वयं सभासद रहा और उसके बाद पांच वर्ष उसकी पत्नी सभासद रहीं। ऐसे में यदि जनप्रतिनिधियों पर ही बिजली नियमों के उल्लंघन के आरोप लगेंगे, तो आम जनता में क्या संदेश जाएगा?
सूत्रों का यह भी दावा है कि छापेमारी की सूचना पहले ही संबंधित व्यक्ति तक पहुंच गई थी, जिसके चलते संभावित अनियमितताओं को छिपाने का प्रयास किया गया। हालांकि इस दावे की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जांच में अनियमितता पाई गई है तो क्या विद्युत विभाग नियमानुसार एफआईआर दर्ज कर कठोर कार्रवाई करेगा, या फिर मामला आपसी समझौते (सेटलमेंट) तक सीमित रह जाएगा?
इस संबंध में जानकारी लेने के लिए विद्युत विभाग के एसडीओ से तीन बार फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इसलिए विभाग का पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका।
अब सभी की निगाहें विद्युत विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई होना आवश्यक है। साथ ही यदि छापेमारी की सूचना पहले से लीक होने के आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो विभागीय मिलीभगत की भी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों को संरक्षण तो नहीं दिया जा रहा।
बड़ा सवाल:
क्या बिजली विभाग कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर प्रभावशाली लोगों के मामलों में भी यह प्रकरण केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएगा?




