इंद्रापुरी गौकशी कांड पर विधायक का बड़ा बयान, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
लोनी में गौकशी के बाद सियासत गरम, विधायक बोले—दोषियों की संपत्ति होगी ध्वस्त

रिपोर्ट सचिन कश्यप
गाजियाबाद। लोनी क्षेत्र के इंद्रापुरी इलाके में श्रावण माह के पहले सोमवार यानी 3 अगस्त को हुई कथित गौकशी की घटना के बाद अब मामला पुलिस कार्रवाई से आगे बढ़कर राजनीतिक बयानबाजी और पुलिस की जवाबदेही तक पहुंच गया है। घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुठभेड़ के दौरान आरोपी अय्यूब पहलवान को गोली लगने के बाद गिरफ्तार किया। घायल आरोपी को उपचार के लिए 50 बेड के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद मामले में एक अन्य आरोपी इमरान तोतला को भी गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

घटना को लेकर लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर का बड़ा बयान सामने आया है। विधायक का आरोप है कि उनके लखनऊ जाने के बाद लोनी का माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया गया। उन्होंने दावा किया कि इस मामले में शामिल इमरान नामक व्यक्ति, जिसे उन्होंने पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मनोज धामा का चालक बताया, भी कथित तौर पर घटना में शामिल था। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान सामने आना बाकी है।
विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने कहा कि घटना में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने आरोपियों की चल-अचल संपत्ति के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
पुलिस कार्रवाई पर भी उठे सवाल
पूरे मामले में पुलिस ने इंद्रापुरी चौकी प्रभारी को निलंबित कर दिया है। वहीं, पुलिस की ओर से अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि घटना एसीपी अंकुर विहार कार्यालय से करीब डेढ़ सौ मीटर की दूरी पर हुई बताई जा रही है, जबकि इंद्रापुरी चौकी घटनास्थल से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर है। ऐसे में कार्रवाई की जिम्मेदारी और निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर घटना के लिए केवल चौकी स्तर पर ही कार्रवाई क्यों हुई?
जांच के दायरे में पुलिसकर्मियों की भूमिका?
इसी बीच मामले में एक और आरोप चर्चा में है। दावा किया जा रहा है कि एसीपी कार्यालय में तैनात सुरजीत नामक व्यक्ति के घटनास्थल के आसपास रहने वाले कुछ लोगों से कथित तौर पर करीबी संबंध हैं। हालांकि इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और यह स्पष्ट नहीं है कि इन कथित संबंधों का घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध है या नहीं।
ऐसे में अब सवाल सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी उठ रहा है कि घटना से पहले पुलिस की स्थानीय इंटेलिजेंस और निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी? यदि घटना पुलिस कार्यालय के इतने नजदीक हुई, तो पुलिस को इसकी भनक पहले क्यों नहीं लगी?
अब आगे क्या?
लोनी में हुई इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन पर जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ गया है। विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने जहां आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और संपत्ति ध्वस्तीकरण की बात कही है, वहीं पुलिस ने चौकी प्रभारी को निलंबित कर अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किस स्तर तक ले जाता है, क्या अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी होती है और क्या पुलिस की भूमिका अथवा लापरवाही की भी विस्तृत जांच की जाती है।
ईगल न्यूज भारत की पड़ताल में अब सबसे बड़ा सवाल यही—घटना के असली जिम्मेदार कौन हैं और जवाबदेही सिर्फ चौकी प्रभारी तक सीमित रहेगी या पूरे सिस्टम की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी?



